दिल्ली – लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने यूपी में मिशन-2019 की सफलता की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कंधों पर डाल दी है। साथ ही RSS ने इसके लिए मुख्यमंत्री योगी को खुलकर फैसले लेने की भी छूट दे दी। जिसके बाद से योगी सरकार में पहले मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर लखनऊ के सत्ता के गलियारे में चर्चाएं तेज हो गई हैं। संघ ने बीजेपी को चुनाव में विपक्ष की जातीय गणित की काट के लिए समग्र हिंदुत्व यानी दलितों व पिछड़ों को भी साथ लेकर चलने की सलाह दी है। गौरतलब है कि मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व से बैठक और लखनऊ में संघ की समन्वय बैठक के बाद संघ ने आरएसएस को चुनाव में जीत के लिए मुख्यमंत्री को पूरी छूट दे दी। जिसके बाद ये माना जा रहा है कि कई मंत्रियों की छुट्टी तय है।

मुख्यमंत्री योगी की दिल्ली में पहले संघ के सहकार्यवाह सुरेश जोशी भैया जी से बातचीत मुलाकात हुई फिर सरसंघचालक मोहन भागवत भी बैठक में शामिल हुए। संघ की तरफ से भाजपा के प्रभारी सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल भी दिल्ली की बैठक  में मौजूद थे।

इस बैठक में संघ की तरफ से कुछ मंत्रियों के कामकाज और आचार-विचार पर सवाल उठाए गए, वहीं खुद सीएम योगी की तरफ से भी कुछ मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर असंतोष जाहिर किया गया। पता चला है कि संघ ने इस फेरबदल को मंजूरी दे दी है, वहीं संघ की तरफ से मुख्यमंत्री योगी को भी हिदायत दी गई है कि सरकार के काम में तेजी जमीन पर दिखनी चाहिए।

दिल्ली में आरएसएस की बैठक के बाद समन्वय बैठक लखनऊ के निरालानगर स्थित सरस्वती कुंज में हुई, इस बैठक में आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने बीजेपी और अन्य अनुषांगिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में काशी, गोरखपुर, कानपुर-बुंदेलखंड, अवध प्रांत के पदाधिकारी और संगठन मंत्री भी हिस्सा लिए, इस बैठक में देर शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे और बैठक को लेकर दत्तात्रेय होसबोले से मंत्रणा की।

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