नयी दिल्ली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को देवघर चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत रद्द करने की सीबीआई की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। साथ ही अदालत ने झारखंड हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई में तेजी लाने का भी निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह हाई कोर्ट द्वारा दिए गए जमानत आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता, विशेष रूप से तब जबकि उस आदेश को जारी हुए लगभग सात वर्ष बीत चुके हैं। सीबीआई की अपील वर्ष 2018 से लंबित है। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी. राजू ने दलील दी कि लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पहले दो बार खारिज हो चुकी थी। बाद में हाई कोर्ट ने यह मानते हुए जमानत दी कि उन्होंने अपनी सजा का 50 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया है, जबकि सीबीआई के अनुसार इस पहलू पर सही कानूनी आधार पर विचार नहीं किया गया क्योंकि यह सजा एक साथ चलने वाली नहीं थी। समाचार एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले से जुड़े पांच मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। यह कथित घोटाला 1992 से 1995 के बीच उस समय हुआ था, जब लालू प्रसाद यादव अविभाजित बिहार के मुख्यमंत्री थे और उनके पास वित्त एवं पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी भी थी। फिलहाल लालू प्रसाद यादव खराब स्वास्थ्य के आधार पर जमानत पर हैं।












