मंत्रिपरिषद के समक्ष शिक्षा एवं युवा कल्याण सेक्टर के विभागों की कार्ययोजना प्रस्तुतिकरण पर मुख्यमंत्री जी के दिशा-निर्देश

माध्यमिक शिक्षा के लर्निंग आउट कम में सुधार, नामांकन में वृद्धि, ड्राप आउट में कमी, ट्रांजिशन और रिटेंशन दर में वृद्धि के लिए व्यापक पैमाने पर कार्य योजना बनाकर कार्यवाही अमल में लाई जाए।

संरचनात्मक शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधार के लिए कक्षा 12वीं में बोर्ड परीक्षा का नया पैटर्न 2025 तक लागू करने की जरूरत है। कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा का नया पैटर्न 2023 से नया सत्र शुरू होने के पहले लागू करें।

कक्षा 09 और 11 में इंटर्नशिप प्रोग्राम, रोजगारन्मुख कौशल शिक्षा और सर्टिफिकेशन, राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण की स्थापना की दिशा में कार्यवाही शुरू की जाए। साथ ही पांच वर्ष पर विद्यालयों का मूल्यांकन और सर्टिफिकेशन भी करें।

पांच वर्षों के भीतर सभी असेवित क्षेत्रों में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कॉलेज की स्थापना के लिए अभी से रणनीति बनाकर कार्यवाही शुरू करें। सभी विद्यलायों में स्मार्ट क्लासरूम, रियल टाइम मानिटरिंग, स्टूडेंट ट्रैकिंग सिस्टम और एकीकृत डाटा प्रबंधन प्रणाली की व्यवस्था लागू होना चाहिए।

दो वर्षों के भीतर संस्कृत शिक्षा निदेशालय का गठन करें। साथ ही शिक्षा में तकनीकी के उपयोग को देखते हुए एकीकृत डाटा प्रबंधन प्रणाली लागू कराएं।

सभी स्तरों पर शैक्षिक पदों की रिक्तियों पर चयन की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूरी की जाए। योग शिक्षक के पदों पर भी चयन की कार्यवाही हो। अध्यापक पुरस्कारों के लिए मानकों में संशोधन करने पर विचार करें।

आगामी सौ दिनों में राजकीय विद्यालयों में वाई फाई की सुविधा, सभी विद्यालयों की वेबसाइट, सभी विद्यार्थियों की ईमेल आईडी, राजकीय विद्यालयों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस शुरू करने के प्रयास हों। करियर काउंसलिंग पोर्टल ‘पंख’ का विकास, विद्यालय ऑनलाइन अनुश्रवण श्रेणीकरण और ई-लाइब्रेरी पोर्टल का विकास किया जाए।

उच्च शिक्षा विभाग ने पिछले पांच वर्षों में गुणात्मक सुधार किए हैं। इसे जारी रखा जाए। उच्च शिक्षण संस्थानों में आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए गुणवत्तापूर्ण सार्वभौमिक और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

नवाचारों में वृद्धि, शोध एवं अनुसंधान में वृद्धि, सकल नामांकन दर में वृद्धि, विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा पर विशेष कार्ययोजना बनाकर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

आगामी सौ दिनों में 120 राजकीय महाविद्यालयों में ई-लर्निंग पार्क और ABACUS-UP के लिए नियमावली बनाकर पोर्टल का शुभारम्भ करें। साथ ही निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल, पांच राजकीय महाविद्यालयों और तीन राज्य विश्वविद्यालयों में इनक्यूबेटर्स का शुभारंभ करें। तीन नए राज्य विश्वविद्यालयों मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय सहारनपुर, राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय अलीगढ़ और महाराजा सुहेल देव राज्य विश्वविद्यालय आजमगढ़ का प्रथम फेज मार्च 2023 तक पूर्ण करें।

यूजीसी ने एक साथ दो डिग्री प्राप्त करने के लिए स्वीकृति दी है। यूजीसी की गाइडलाइन के अनुरूप यहां रणनीति तैयार की जाए।

संस्कृत को तकनीकी के माध्यम से रोजगार से जोड़ने की आवश्यकता है। 180 घंटे का सर्टिफिकेट और 360 घंटे का डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करें।

आनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जाए। संस्कृत की पारंपरिक विद्या, कर्मकांड, ज्योतिष, वास्तुशास्त्र और योग आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षण देना, अर्चक और पुरोहित तैयार करने की दिशा में कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ाएं।

कौशल विकास मिशन ने गत वर्षों में युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर सेवायोजित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। अब विकास खण्ड स्तर तक कौशल प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में प्राथमिकता के आधार पर कार्यवाही करें और जिला कौशल विकास योजना के अनुरूप नए कोर्सेस का विकास किया जाए।

जापान में उद्योगों के संचालन के लिए कुशल जनशक्ति की आपूर्ति और जापानी भाषा के अध्ययन की भी व्यवस्था की जाए।

प्रदेश में स्किल यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए फिजिबिलिटी स्टडी एवं भूमि का चयन समय से कर लिया जाए।

छह माह में नयी शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रथम चरण में 25 हजार माध्यमिक और उच्चतर कक्षाओं के छात्रों का कौशल प्रशिक्षण किया जाए। सौ दिनों में तीन रोजगार मेलों का आयोजन किया जाए।

कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए अगले छह माह में 10 हजार से अधिक प्रशिक्षार्थी को कंस्ट्रक्शन सेक्टर में प्रशिक्षित किया जाए।

दो वर्षों में राजकीय आईटीआई में इग्नू के लर्निंग सेंटर की स्थापना और छात्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण के साथ ही उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराएं।

शहरी क्षेत्र में सर्विस सेक्टर जैसे हाउस कीपिंग, हॉस्पिटैलिटी, वेयरहाउस, एकाउंटिंग इत्यादि में प्रशिक्षण में विशेष प्राथमिकता दी जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published.