प्रदेश सरकार विकास कार्यो का अमली जामा पहनाने में गम्भीर नही है, सरकार की अनुभवहीनता के कारण दक्ष अधिकारियों को दर किनार कर केंद्र से ऐसे अधिकारियों को वापस बुलाया गया है जो सरकार की अपेक्षाओं पर अनुकूल नही बैठ रहे है । सरकार ने तो ऐसे मुख्य सचिव को बना दिया है जो पंचायत तो अच्छी करते है लेकिन उनकी बात अधिकारी गंभीरता से नही लेते. दिन में कई -कई समीक्षा बैठके होती है लेकिन धरातल पर कुछ भी नही होता ।

मुख्य सचिव पद वैसे ही भारी-भरकम माना जाता है फिर भी उन्हे अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग का भी पद दे रखा गया है । ऐसे ही संजय अग्रवाल, डा प्रभात कुमार, कल्पना अवस्थी, रेणुका कुमार, आलोक सिन्हा, आलोक कुमार, अवनीश कुमार अवस्थी इत्यादि आई ए एस अधिकारी योगी सरकार के कृपा प्राप्त होने के कारण एक से अधिक विभागों का चार्ज दे रखा है.

ताजुब तो तब हुआ जब कुछ दिनों के अवकाश जाने पर गृह विभाग जैसे अति महत्वपूर्ण विभाग का चाज॔ भी अवनीश कुमार अवस्थी को दिया गया जबकि उनसे संबधित एक जांच की काय॔वाही ग्रह गोपन 8 में लंबित है। नियमानुसार एक आई ए एस अधिकारी को एक से अधिक विभागाध्यक्ष के पद पर नियुक्त नही किया जा सकता है फिर भी सरकार नियमों की अनदेखी कर अपने चहेते अधिकारियो को मलाई दार पदो पर सुशोभित कर रखा है । फलस्वरूप कई विभागो का बोझ होने के कारण हकीकत में विकास काय॔ जनता को नजर नही आ रहे है सिफ॔ गाल बजाई हो रही है ।

राजन मित्तल (अभियंता यू पी आर एन एन )सहित कई आई ए एस जैसे आर के तिवारी, नितिन रमेश गोकर्ण, प्रशांत त्रिवेदी, रितु महेश्वरी, मनोज सिंहा, आलोक कुमार प्रथम आदि अधिकारियों का कार्य  संतोषजनक न होने के साथ ही समय समय पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहें है? लेकिन फिर भी यह अधिकारी सरकार के कृपा प्राप्त बने हुए है ।

योगी सरकार अधिकारियों की कमी का रोना रोती रहती है लेकिन सरकार की इच्छा शक्ति जब तक विकास के लिए दॄढ संकल्पित नही होगी, और अपनी पसंद के चापलूस अधिकारियों को कई – कई विभाग दिए जाते रहेंगे प्रदेश की विकास स्थिति में कोई सुधार नही होगा.

प्रदेश में ऐसे अधिकारियो की तादाद बड़ी संख्या में है जो वर्तमान  में महत्वपूर्ण विभागों में बैठे अधिकारियों से कई गुना अधिक कार्य  करने की क्षमता के वाबजूद उन्हे महत्व हीन विभागों में बैठाल दिया गया है । योगी सरकार जब तक निष्पक्ष ढंग से अधिकारियों की नियुक्ति नही करेगी प्रदेश के विकास का निर्धारित लक्ष्य पाना मुश्किल प्रतीत होता है ? /

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