तंजीम फातिमा रामपुर लोकसभा से लड़ेंगी चुनाव, सपा की तरफ से दो नामांकन पत्र खरीदे, यहां से लीं एनओसी….

रामपुर,उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट से पूर्व कैबिनेट मंत्री मुहम्मद आजम खां की पत्नी डॉ. तंजीम फातिमा उप चुनाव में प्रत्याशी होंगी.उनके नामांकन के लिए शनिवार को नामांकन पत्र खरीद लिए गए हैं.सपा ने दो नामांकन पत्र खरीदें हैं.इसमें एक डॉ. तंजीम फातिमा और दूसरा नगर अध्यक्ष आसिम राज़ा के नाम से खरीदा गया है.इसके साथ ही नगर पालिका समेत संबंधित विभागों से एनओसी ली गई.नामांकन के अंतिम दिन यानी सोमवार को डॉ. तंजीम फातिमा नामांकन कराएंगी. वह राज्यसभा सदस्य और रामपुर शहर सीट से विधायक रह चुकीं हैं.इसके साथ ही जौहर यूनिवर्सिटी में भी हैं.
रामपुर लोकसभा सीट से भाजपा ने बरेली-रामपुर एमएलसी सीट के पूर्व एमएलसी घनश्याम लोधी को उतारा है.उनको मुहम्मद आजम खां ने ही दोनों बार एमएलसी बनवाया था, लेकिन यूपी विधानसभा चुनाव 2022 के समय वह सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे.उन्हें भाजपा ने एमएलसी का चुनाव नहीं लड़ाया था.मगर, अब रामपुर लोकसभा सीट से उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया है.रामपुर और आजमगढ़ में लोकसभा उपचुनाव के लिए 30 मई को गेजेट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा.यहां नामांकन की आखिरी तारीख 06 जून रखी गई है. 07 जून को नामांकन पत्रों की स्कूटनी की जाएगी. 09 जून तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे, जबकि 23 जून को वोटिंग और 26 जून को मतगणना होगी.रामपुर लोक सभा सीट पर करीब 16:50 लाख मतदाता है. यहाँ मुस्लिम मतदाता करीब 54 फीसद हैं. 2019 में आजम खां ने भाजपा प्रत्याशी एवं अभिनेत्री जयाप्रदा को करीब 1.10 लाख वोट से हराया था.आजम को 559177 और जया प्रदा को 449180 वोट मिले थे.

-रामपुर में पांच में से तीन विधानसभा पर सपा का कब्जा
इस लोकसभा में रामपुर शहर, स्वार, बिलासपुर, चमरौआ और मिलक विधानसभा है.इसमें से शहर, चमरौआ और स्वार सीट पर सपा का कब्जा है, जबकि बाकी दो सीट सपा के पास हैं.

-फर्जी जन्म प्रमाण पत्र में गई थीं जेल
डॉक्टर तंजीम फातिमा अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के फर्जी प्रमाण पत्र के मामले में अपने पति मुहम्मद आजम खान और बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ जेल गई थी.वह 26 फरवरी 2020 को जेल गई थी.

-अबुल कलाम आजाद पहले सांसद
रामपुर लोकसभा सीट से सबसे पहली बार 1952 में हुए पहले संसदीय चुनाव में कांग्रेस की ओर से डॉ. अबुल कलाम आजाद ने जीत दर्ज की थी. 1952 से लेकर 1971 तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा,लेकिन 1977 में एक बार भारतीय लोकदल के प्रत्याशी यहां से जीते. लेकिन कांग्रेस का फिर से यहां पर दबदबा कायम हो गया.1999 में पहली बार भाजपा के मुख्तयार नकवी, फिर 2004 और 2009 में सपा की जया प्रदा ने जीत दर्ज की.2014 में भाजपा के नेपाल सिंह जीते.मगर, 1999 के चुनाव में मुहम्मद आजम खां ने जीत दर्ज की थी.

 

 

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