1. पॉलीहाउस में टमाटर व चेरी  टमाटर एक अच्छी आय का साधन।
    काकोरी। मौसम में लगातार परिवर्तन के कारण खुले वातावरण में सब्जियों का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही है। जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए आधुनिक पद्धति एवं उन्नत कृषि तकनीक को अपनाते हुए पॉलीहाउस में सब्जियों का उत्पादन एक अच्छा विकल्प साबित हो रहा है।

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेड़ा के निदेशक डा. शैलेन्द्र राजन बताते हैं कि केन्द्र सरकार की योजना किसानों की लागत आधी करने और उत्पादकता बढ़ाने के लक्ष्य पर काम करते हुए संस्थान में स्थित सुनियोजित कृषि विकास केन्द्र (पी.एफ.डी.सी.) को पौष्टिक तत्वों से भरपूर गुणवत्तायुक्त टमाटर के उत्पादन में बड़ी सफलता हासिल हुयी। संस्थान में स्थित यह केन्द्र अधिक उपज के लिए प्लास्टीकल्चर से सम्बन्धित कृषि एवं बागवानी की प्रौद्योगिकी परिष्करण एवं क्षमता संवर्धन पर कार्य कर रहा है। विगत 5-6 वर्षों से टमाटर की संकर प्रजातियों पर शोध के उपरान्त यह पाया गया कि पॉलीहाउस में टमाटर की कुछ विशेष किस्मों जैसे कि हिमशिखर, हिमसोना, एनएस-1218,अभिलाष,अविनाश-2,नवीन, सरताज प्लस, देव,शहंशाह,अर्का रक्षक,अर्का सम्राट एवं चेरी टमाटर का उत्पादन संरक्षित खेती के माध्यम से लम्बे समय तक सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
तुलनात्मक अध्ययन के दौरान पॉलीहाउस में लगाये गये पौधों का उत्पादन बाहर लगाये गये उसी प्रजाति के पौधों की उत्पादकता से लगभग 3-5 गुना अधिक पाया गया। कुछ प्रजातियों में टमाटर का उत्पादन पॉलीहाउस में 15-20 किग्रा. प्रति पौधा तक मिला। जबकि उसी प्रजाति के बाहर लगाये पौधों में मात्र 5-8 किग्रा प्रति पौधा टमाटर पाया गया। इसके साथ ही प्रमुख पौष्टिक तत्व लाइकोपीन एवं अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा चेरी टमाटर में सबसे ज्यादा (8.7 मिग्रा./100 ग्रा.) पायी गयी। पॉलीहाउस में लगाये गये पौधों में टमाटर के फलों का एकसमान आकार एवं लाल रंग जो कि टमाटर के फलों की गुणवत्ता का सूचक एवं मूल्य निर्धारण का एक प्रमुख कारक है बाहर के फलों की तुलना में ज्यादा अच्छा पाया गया है।
परियोजना से जुडे संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक एवं परियोजना अन्वेषक डाo वी. के. सिंह ने बताया कि यह सफलता पौधों में छत्र प्रबन्धन, टपक सिंचाई, सिंचाई जल के साथ उर्वरक देना (फर्टिगेशन) तथा मल्चिंग तकनीक को अपनाकर मिली है। इस तकनीक के तहत पौध रोपण के 20-25 दिन बाद टमाटर के पौधों को 30 सेमीo ऊपर से काटकार उसकी दो शाखाओं को बढ़ने दिया जाता है। बढ़ते हुए पौधों को सहारा देने के लिए नॉयलॉन के तार के सहारे प्रत्येक शाखा को बाँधते हैं। इन शाखाओं को फसल के अन्त तक रखा जाता है। दोनों शाखाओं पर समान आकार व गुणवत्तायुक्त फल आते हैं। शेष सभी शाखाओं को हटाते रहना चाहिए। इससे दोनों शाखायें तने से एक साथ निकलती हैं व जड़ से समान रूप से पोषण प्राप्त करती हैं। इस तकनीक में फर्टिगेशन एवं मल्चिंग से पोषण तत्व उपलब्ध कराने व पानी एवं खरपतवार को नियंत्रित करने की लागत में काफी कमी आयी जिससे इस तकनीक से टमाटर उत्पादन द्वारा किसानों की आय वृद्धि में समुचित बढ़ोत्तरी हो सकती है।

टमाटर के एक पौधे पर 8-12 गुच्छे लगते हैं। एक गुच्छे में 6-10 टमाटर पाये जाते हैं। परन्तु कुछ प्रजातियों में 14-18 गुच्छे व एक गुच्छे में 8-10 फल पाये गये जिसमें एक फल का वजन लगभग 150-180 ग्राम तक होता है। वही चेरी टमाटर के एक गुच्छे में 25 फल तक पाये गये हैं जिसमें एक टमाटर का वजन 15-25 ग्राम तक होता है।

पॉलीहाउस में लगाये गये टमाटर की भण्डारण क्षमता बाहर लगाये गये पौधों के फलों की तुलना में काफी अधिक होती है एवं फलों के उपरी सतह पर कवक, फफूंदी, यीस्ट, बैक्टीरिया आदि की संख्या भी बाहर लगाये हुए पौधों के फलों की तुलना में लगभग नगण्य होती है।

इसके साथ-साथ पॉलीहाउस में टमाटर की पैदावार 6 महीने तक ली जा सकती है, जबकि खुले वातावरण में इसकी पैदावार की अवधि लगभग इसकी आधी होती है। पॉलीहाउस में लगभग 2500-3000 कुन्तल सामान्य प्रजाति के टमाटर व 800-1000 कुन्तल चेरी टमाटर प्रति हेक्टेयर उत्पादन किया जा सकता है। इस नयी तकनीक को अपनाकर किसान टमाटर की फसल उत्पादन की लागत में कमी करके अपनी आय में 3-4 गुना तक बढ़ोत्तरी कर सकते।

वही निदेशक डॉक्टर शैलेंद्र राजन ने बताया कि पॉलीहाउस का उपयोग करके उच्च गुणवत्तायुक्त टमाटर का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा सकता है। पॉलीहाउस में टमाटर उत्पादन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उत्पादन का उच्चतम स्तर हमें तब प्राप्त होता है जब बाजार में टमाटर का भाव अधिकतम हो जिससे किसान पॉलीहाउस में टमाटर की खेती से कम समय में अधिक लाभ कमा सकेंगे।

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