लखनऊ – यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एंटी रोमियों दल समेत तमाम योजनाओं का हवाला देकर महिलाओं की सुरक्षा के तमाम दावे करे लेकिन हकीकत ये है कि यूपी की बेटियां अब सुरक्षित नहीं हैं। ताजा मामला अमरोहा जिले का है जहां एक युवती ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ विभाग में नौकरी दिलवाने का झांसा देकर रिटायर्ड सीएमओ ने उसके साथ दुष्कर्म किया फिर उनके सहयोगी डिप्टी सीएमओ लाखो रूपये लिए साथ ही साथ गैंगरेप भी किया। युवती ने जब मामले का विरोध किया तो पीड़ित युवती के भाई पर रंगदारी मांगने के आरोप में उसे जेल भिजवा दिया साथ ही पीड़िता पर दबाव बनाया कि मामले को रफा-दफा कर दे।

महिला द्वारा दिए गए रेप के सबूत जिसकी विलेज दर्पण पुष्टि नहीं करता। महिला का आरोप है कि ये उसी समय के फोटोज़ हैं जब उसके साथ रेप हुआ था।

पीड़िता ने जब पुलिस से मदद की गुहार लगाई तो पुलिस ने पीड़िता की मदद के नाम पर कुछ नहीं किया। रिटायर्ड सीएमओ का रसूख ऐसा है कि पुलिस अधिकारी पीड़िता से फोन पर कुछ इस तरह से जानकारी लेते रहे जैसे वो आरोपियों की तरफ से खुद पैरवी पर हो।
बता दें कि पीड़ित महिला यूपी के अमरोहा जिले गजरौला बस्ती की रहने वाली है जो की रोजी-रोटी के लिए एक निजी अस्पताल में रिसेप्शन पर काम करती थी आरोप है उसी दौरान खुद को रिटायर्ड सीएमओ बताने वाले डॉ.मुमताज़ अंसारी नाम के व्यक्ति ने युवती को स्वास्थ्य विभाग में नौकरी लगवाने के लिए जरूरी कागजात लेने का बहाना बनाकर उसके घर जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया यही नहीं रिटायर्ड सीएमओ के साथी डिप्टी सीएमओ दिनेश खत्री ने भी दुष्कर्म किया और पीड़िता से लाखो रूपए भी ले लिए, पीड़िता का आरोप है एक-एक कर सीएमओ, डिप्टी सीएमओ और स्टेनो ने उसकी अस्मत लूटी और उसे खामोश रहने को भी कहा रूपए जाने और अस्मत भी लूटने से आहत युवती ने मामले की शिकायत पुलिस को की आरोप है पुलिस ने उस वक्त मामला तो नहीं दर्ज़ बल्कि आरोपियों की शिकायत पर पीड़िता और उसके भाई पर रंगदारी का आरोप लगाते हुए पीड़िता के भाई कर कार्रवाई कर दी।

 

महिला ने दिखाए रेप के सबूत, इसकी पुष्टि विलेज दर्पण नहीं करता।

मामला आलाधिकारियों तक पंहुचा तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज़ तो कर ली लेकिन पीड़िता ने पुलिस पर भी आरोप है लगाते हुए पुलिस अधिकारी आईजी मुरादाबाद की पीड़िता से बातचीत की भाषा शैली को गलत ठहराया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पहले उसकी सुनवाई नहीं और सुनवाई की तो पुलिस अधिकारी ऐसे बात कर रहे हैं जैसे वो खुद आरोपियों के हमदर्द बन बैठे हैं। यही नहीं पीड़िता ने दावा किया कि उसके पास ऐसे तमाम सबूत हैं जो महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को सिद्ध करते हैं लेकिन पुलिस मामले की निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही है।

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