बुंदेलखंड का नाम करेगी रोशन, जग में हमारी राजदुलारी

झाँसी। मेरा नाम करेगी रोशन, जग में मेरी राजदुलारी। जी हां, टियों को अभिशाप समझने वाले यह नहीं जानते कि बेटे यदि बुढ़ापे का सहारा बनते हैं तो बेटियां भी उनसे कम नहीं होतीं। उन्हें भी अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका भर चाहिए, बस। फिर देखो कैसे सफलता की बुलंदियों पर पहुंचकर वे अपना, पिता और परिवार के साथ देश का नाम रोशन करती हैं। ऐसी ही एक प्रतिभा हमारे बुंदेलखंड के जालौन जनपद स्थित उरई में जन्मी। जिसके जन्म पर अफसोस जताने वाले परिवार के सदस्य आज उसकी वजह से समाज में सीना चौड़ा करके चलते हैं और फक्र से कहते हैं कि ये हमारी बेटी है।

परिवार को जन्म के समय लगा था बहुत बुरा

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन स्थित उरई निवासी अरविंद कुमार के यहां लगभग दस-बारह वर्ष पूर्व बेटी का जन्म हुआ। बेटी पैदा होने से पूरे परिवार में मातम छा गया और परिवार के साथ-साथ स्वयं अरविंद की पत्नी ने भी अफसोस जताया। लेकिन अरविंद ने तो कुछ और ही ठान रखी थी। उन्होंने इस बेटी की ही उस बेटे के रूप में परवरिश करने का निर्णय लिया, जिस पर उन्हें ही नहीं बल्कि सारे समाज और पूरे देश को गर्व हो।

उरई छोड़ झाँसी आकर बस गए अरविंद

अरविंद ने अपनी पत्नी को समझा-बुझा कर नवजात बेटी का विरोध करने वाले परिवार को ही छोड़ अलग बसने का निर्णय लिया। वे पत्नी व अपनी मासूम बेटी को लेकर झांसी आ गए और आवास विकास कॉलोनी में रहने लगे। बेटी का नाम रखा गया लगन लाक्षाकार। नाम के अनुरूप ही बेटी में सबकुछ सीख लेने की लगन थी। उसका स्कूल में दाखिला कराया गया और प्रारंभिक शिक्षा शुरू हो गई।

गुरु ने शुरू की स्वीमिंग और कराटे की ट्रेनिंग

झांसी में जब लगन स्कूल जाने लगी तो उसकी प्रतिभा को देखते हुए अरविंद भी उसके लिए योग्य गुरु की खोज करने लगे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कराटे और स्वीमिंग के गुरु दीनदयाल मिश्रा से हुई। दीनदयाल के कहने पर अरविंद ने अपनी बेटी को उनसे शिक्षा दिलाना शुरू की। धीरे-धीरे आज लगन लगभग 12 वर्ष की  हो गई। साथ ही कराटे में पारंगत भी।

21 गोल्ड मेडल जीत चुकी है अभी तक लगन

लगन ने कराटे सीखा और प्रदेश के साथ ही देश व विदेश की विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया। अभी तक वह  21 गोल्ड मेडल जीत चुकी है। कक्षा 4 की बारह वर्षीय छात्रा लगन की यह शुरूआत है। पिछले दिनों नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम हुई प्रतियोगिता में लगन ने गोल्ड मेडल जीता और उसे भारत सरकार की ओर से थाईलैंड में आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए चयनित किया गया।

उमा भारती व राजीव पारीछा ने की मदद

विदेश जाने के लिए अरविंद के पास रुपए न थे। बेटी के गुरु दीनदयाल ने उन्हें जनप्रतिनिधियों से मदद लेने की सलाह दी। इस पर लगन के पिता अरविंद ने केंद्रीय मंत्री उमा भारती व बबीना विधायक राजीव पारीछा से बातचीत की। दोनों नेताओं ने उनकी आर्थिक मदद की। जिसकी वजह से लगन थाईलैंड गई और वहां भी सफलता के झण्डे गाड़ आई। उसने वहां भी गोल्ड मेडल जीता।

थाईलैंड के बाद यूएसए व इंग्लैंड में दर्ज की जीत

लगन की सफलता का रथ लगातार दौड़ रहा है। थाईलैंड से वापस आने पर उसे कराटे प्रतियोगिता में यूएसए और इंग्लैंड भी भेजा गया। इस नन्हीं चैम्पियन को सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से भी सम्मानित किया है।

मासूम लगन बच्चों को सिखाती है योगा

स्कूल में पढ़ाई, दिन भर की थकान भरी ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं में जी-तोड़ मेहनत के बाद जब खाली समय बचता है तो छुट्टी के दिन लगन अपने घर पर योगा क्लासेस लगाती हैं। इसमें उसके जैसे ही 84 बच्चे उसके साथ योगा सीखते हैं। वह चाहती हैं कि देश का नाम दुनिया में ऊंचाई तक ले जाएं और अपने पिता और देश को एक नई पहचान  दिलाएं।

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