बॉम्बे हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने गुरुवार को कहा है कि देश इस वक्त बुरे दौर से गुजर रहा है, जिसमें कोई व्यक्ति स्वतंत्र होकर ना कुछ कह सकता है और ना ही घूम सकता है। जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस भारती डांगरे की पीठ ने अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने वाले तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पन्सारे के परिजनों द्वारा दाखिल की गई एक याचिका पर टिप्पणी करते हुए ये बातें कहीं। बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि हम आज देश में एक बुरे दौर के गवाह बन रहे हैं। देश के नागरिकों को लगता है कि वो अपनी आवाज स्वतंत्र होकर और बिना किसी परेशानी के नहीं कह सकते हैं। क्या हम ऐसा दिन देखने जा रहे हैं, जब हर कोई व्यक्ति को खुलेआम बोलने और घूमने के लिए पुलिस सुरक्षा की जरुरत होगी?

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