यूपी में बीजेपी की सरकार बनने और उस पर भी योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सूबे की महिलाओं में नई उम्मीद जगी थी कि अब वे सुरक्षित हो जायेंगी लेकिन योगी आदित्यनाथ महिलाओं की अपेक्षाओं पर कतई खरे नहीं उतर सके हैं. यूपी में कानून व्यवस्था को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाकर सत्ता पर काबिज हुई भारतीय जनता पार्टी की सरकार अब कानून व्यवस्था के मुद्दे पर जबरदस्त रूप से फ्लॉप साबित हो रही है. इस सरकार में दहेज हत्या, दुष्कर्म, छेड़छाड़ व महिला उत्पीड़न के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं, जो कि पिछली सरकार के मुकाबले काफी ज्यादा है।

लखनऊ निवासी एक सामाजिक कार्यकर्ता संजय शर्मा ने आरटीआई के तहत समाजवादी पार्टी के शासनकाल और भाजपा शासनकाल में हुए अपराधों के आंकड़े हासिल किए हैं।आरटीआई अर्जी पर सूबे के राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो ने जो सूचना दी है उससे यह चैंकाने वाला खुलासा हुआ है कि योगी सरकार के समय में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के मुकाबले सामने 7 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है.

ये आंकड़े सपा शासनकाल के 16 मार्च, 2012 से लेकर 15 मार्च, 2017 तक के हैं। वहीं भाजपा सरकार में 16 मार्च, 2018 से लेकर 30 जून, 2018 तक हुए अपराधों का विवरण है। एक्टिविस्ट संजय ने बताया कि इस प्रकार अखिलेश यादव के समय 826 दिनों में सूबे में महिलाओं के खिलाफ विभिन्न श्रेणियों के कुल 179749 अपराध हुए जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के समय 107 दिनों में ही सूबे में महिलाओं के खिलाफ विभिन्न श्रेणियों के कुल 76416 अपराध घटित हो गए हैं

अखिलेश के समय में 28 से कम महिला उत्पीड़न के मामले प्रतिदिन हो रहे थे जो योगी के समय में 6 से अधिक गुना बढ़कर 192 से अधिक मामले प्रतिदिन हो गए हैं स सर्वाधिक घृणास्पद  पास्को कानून के तहत अखिलेश के समय में 8 से कम प्रतिदिन की दर से दर्ज होने वाले बच्चों के प्रति अपराध के मामले योगी के समय 8 से अधिक गुना बढ़कर 65 से अधिक मामले प्रतिदिन हो गए हैं, इस प्रकार यदि देखा जाए तो अखिलेश यादव के समय में महिलाओं के खिलाफ सभी श्रेणियों के 99 से कम अपराध प्रतिदिन घटित हुए जो अब आदित्यनाथ योगी के समय में 7 से अधिक गुना बढ़कर 714 अपराध प्रतिदिन पर आ गए हैं.

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