काशी,संकट मोचन दरबार का 2 साल बाद सुर फुहार ने अभिषेक किया। इसमें कलाकारों के साथ ही संगीत रसिक श्रद्धालुओं को भी भक्ति रस से भिगोया। संकट मोचन समारोह की 99 वी कड़ी की पहली निशा में ख्यात ड्रमर शिवमणि ने मंच सम्भाला। पाश्चात्य शैली के लिए पहचाने जाने वाले ड्रम में शास्त्रीय संगीत पिरोकर विभोर किया। ताल को लय में कुछ इस तरह पिरोया कि श्रोताओं ने ड्रम वादन सुनने के साथ ही देखने का भी मजा लिया।

शिवमणि ने ड्रम पर गणेश वंदना गजानन भूतगणादि की धुन निकाली और यू1राजेश मैन्डोलिन ने थाप को एकाकार कर दिया। शिवमणि के ड्रम-तबला व अन्य भारतीय वाद्य यंत्रों संग यू राजेश के मेंडोलिन की नोकझोंक को श्रोताओं ने खूब सराहा।

दूसरी प्रस्तुति में इंदौर के शास्त्रीय गायक गौतम काले ने राग जोग में सुर लगाया। विलंबित एक ताल में पिया घर ना बंदिश में विभोर कर दिया। अपने गुरु पण्डित जसराज की स्मृति में हुनमान लला मेरे प्यारे सखा सुनाया तो पुरा परिसर जसराजमय हो गया। तीसरी प्रस्तुति में पण्डित विश्वमोहन भट्ट ने मोहनवीणा संभाली तो उनके पुत्र सलिल भट्ट ने सिद्धवीणा के तार छेड़े।

 

संकटमोचन संगीत समारोह की शुरुआत मन्दिर के महंत प्रोफेसर विश्वम्भर नाथ मिश्रा के अध्यक्षता में हरिराम द्विवेदी ने उद्घोषणा कर के की। महंत विश्वम्भर नाथ मिश्रा ने कलाकारों को आशीर्वाद भी दिया। इस दौरान डॉ विजयनाथ मिश्रा ने संयोजन में सहयोग किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published.