कमलेश यादव

ऐतिहासिक काकोरी कांड का गवाह रहा इतिहासिक काकोरी रेलवे स्टेशन अवस्थाओं का बोल बाला बना हुआ है। रोजाना स्टेशन से दो -तीन सौ यात्री ट्रेन में सफर करने के हुए आवागमन यात्रियों का  रहता है। इनमें नौकरी पेशा करने से लेकर छात्र-छात्राएं शामिल है ।लेकिन यात्रियों की सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। कर्मचारियों के बैठने के लिए न तो  लिए कुर्सियां है न बेंचें बची हुए है । यात्रियों  की सुविधा के लिए बने शौचालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। और उन शौचालय में ताले जड़े हुए है। गर्मी  धूप  व बारिश से बचने के लिए रेलवे स्टेशन पर टीन सेट तक नहीं है । काकोरी ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन 2 अगस्त 1925 को देश को आज़ादी दिलाने वाले  वीर जवानों ने देश के ख़ातिर  ट्रेन लूट कांड को अंजाम दिया था। काकोरी कांड का गवाह ऐतिहासिक महत्व होते हुए भी इस स्टेशन का कोई विकास नहीं हुआ है जनप्रतिनिधि मात्र खोखले वादे करते हैं ।यहाँ से अप डाउन की  मात्राएं 10 पैसेंजर ट्रेनें ही रूकती है ।रोजाना करीब 100 से अधिक ट्रेनें इस स्टेशन से गुजरती है।यह स्टेशन बाज नगर स्थित काकोरी शहीद स्मारक से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। स्टेशन पर यात्रियों के लिए पीने के लिए लगे हुए हैंड पम्पो में अधिकतर खराब व सूखे हुए है। यात्रियों के बैठने के लिए सुविधाजनक बेंचें भी नहीं है। रेलवे की तरफ से लगाने वाले खान पान का काउंटर बंद पड़े हैं रेल कर्मचारी बदहाल पड़ी कुर्सियों पर बैठने को मजबूर । अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक दिन करीब 100 से डेढ़ सौ टिकट की बिक्री होती है । यहां यात्रियों  के लिए  वेटिंग रूम भी नहीं है ।स्टेशन मास्टर पोर्टर व दो कर्मचारियों  का स्टॉप रहता है ।मगर इन कर्मचारियों के लिए बैठने के लिए महज दो ही कुर्सियां मौजूद है ।स्टेशन मास्टर के अनुसार यहां पर तैनात सफाई कर्मी की मौत होने के बाद से 2006 से कोई भी सफाई कर्मी नियुक्ति नहीं की गई है।जिसके जिसके कारण स्टेशन की सफाई व्यवस्था नही हो पा रही है।

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