सरसों के लहलहाते खेतों के बीच शुरू हुई गेहूं की बुआ

कानपुर देहात  शीत ऋतु के आते ही रबी की फसलों की बुआई होने लगी है।

सरसों और चना की बुआई के बाद अब किसानों ने गेहूं की फसल भी बोनी शुरू कर दी है।

सरसों के लहलहाते खेतों के आस-पास के खेतों में गेहूं की फसल बोने के लिए किसानों ने खेतों को जोतना शुरू कर दिया है।

मौसम का बदलाव और गेहूं की फसल को बोने का यह सबसे अच्छा समय है यह बात कमालपुर के पूर्व प्रधान शिवप्रताप सिंह गौर  में खेती ।

उन्होंने बताया कि शीत ऋतु आते ही कुछ किसानों ने अपने खेतों में सरसों और चना जैसे बीजों को बो दिया था।

जिसके चलते आज वह बीज पौधा बनकर लहलहा रहे हैं। वहीं, किसानों ने मौसम के सही होते ही गेहूं की फसल को भी बोना शुरू कर दिया है।


घरों में खड़े जंग खा रहे ट्रैक्टर आज खेतों में दौड़ते नजर आ रहे हैं।

गेहूं की फसल बोने के बाद उसको पकने में लगभग अब तीन से चार माह का समय लगेगा। गेहूं की फसल बोने के लिए नवम्बर और दिसम्बर का समय अच्छा माना जाता है

जिसके चलते दिसम्बर के अंतिम समय तक सभी जगह गेहूं की फसल बो दी जाएगी। फसल बोने के कुछ दिनों बाद उसमे पानी लगाया जाता है।

वहीं जब बीज से पौधा निकल कर धरती से बाहर आता है तो आप पास पैदा हुए खर पतवार को हटाने का काम किया जाता है।

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