लॉकडाउन ने लॉक कर दिया अरमान, कुम्हारों के थमे चाक, दाने-दाने के मोहताज


लखनऊ। (आरएनएस )समाज का ऐसा कई तबका है जो पुश्तैनी धंधे में जुटा हुआ है। पुश्तैनी धंधे से अपनों का जीविकोपार्जन करता है। इसमें मिट्टी का काम करने वाला प्रजापति समाज भी शामिल है। प्रजापति समाज जिन्हें इलाकाई बोलचाल में कुम्हार कहा जाता है लॉकडाउन में मुफलिसी का दंश झेलने को मजबूर हो गया है।


खासकर ऐसे लोग जो मिट्टी का बर्तन बनाते और बेचते हैं। साथ ही चाक पर कुल्हड़ बनाकर बाजार में बेचकर कमाई करते हैं। वे अब लॉकडाउन में असहाय हो चले हैं। लॉकडाउन ने उनके अरमानों को ही लॉक कर दिया है। सदर तहसील के मुसइतपुर बेवाना के मटरू प्रजापति बताते हैं कि सालों से प्रतिदिन करीब चार से पांच सौ कुल्हड़ का निर्माण करते आ रहे हैं और पकाने के बाद प्रतिदिन बाजार में चार से पांच सौ कुल्हड़ की बिक्री करते थे। प्रति सैकड़ा 35 रुपए की दर से कुल्हड़ बेचकर प्रतिदिन करीब 200 रुपए की कमाई करते थे। लॉकडाउन में एक रुपए की भी कमाई नहीं हो पा रही है। इसका कारण दुकानों का बंद होना है। दुकानों के बंद रहने से उनके मिट्टी के बर्तन और कुल्हड़ बिक नहीं रहे हैं। जिससे आर्थिक संकट है। मुफलिसी का दंश झेलना पड़ रहा है।

Like us share us

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *