हादसों को न्यौता दे रहे बेसहारा पशु, लापरवाह नगर निगम

सरकार के आदेश के बावजूद पशुओं की नहीं हो रही धर-पकड़

कई बार जानवरों को पकडऩे के बाद छोड़ देते हैं नगर निगम कर्मी

लखनऊ।(आरएनएस ) राजधानी की सडक़ों पर घूम रहे बेसहारा पशु हादसों को न्यौता दे रहे हैं। इनके कारण कई हादसे भी हो चुके हैं।

सरकार के आदेश के बावजूद नगर निगम इनकी धर-पकड़ और इनके संरक्षण की व्यवस्था नहीं कर रहा है।

निगम कर्मी कभी-कभी अभियान चलाकर इन पशुओं को पकडऩे की खानापूर्ति करते हैं। तमाम शिकायतों के बावजूद नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।


नगर निगम की लापरवाही के चलते राजधानी की सडक़ों पर तमाम बेसहारा पशु घूम रहे हैं जबकि सरकार ने इनके निवास और चारे का प्रबंध करने का निर्देश जारी कर रखा है।

सडक़ों पर घूमने वाले पशुओं में अधिकांश गोवंश से जुड़े हैं।

इनकी दुर्दशा का आलम यह है कि ये गलियों और सडक़ों में लगे कूड़े के ढेर में खाना खोजते फिरते हैं।

यही नहीं ये पशु सडक़ों और चौराहों पर बैठे दिखते हैं। इसके कारण हादसों का खतरा बना रहता है। कई बार इनके हमलों से लोग घायल भी हो चुके हैं।

यह स्थिति तब है जब नगर निगम को इन बेसहारा पशुओं को पकडऩे और उन्हें गोशालाओं में पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।

बावजूद इसके नगर निगम कर्मी इस मामले में पूरी लापरवाही बरत रहे हैं।

नगर निगम कभी-कभी खानापूर्ति के लिए बेसहारा पशुओं की धर-पकड़ के लिए अभियान चलाता है।

हैरानी की बात यह है कि नगर निगम कर्मी पशुओं को पकडकऱ कांजी हाउस तक ले जाते हैं और बाद में इनको छोड़ दिया जाता है।

इसकी बड़ी वजह इन कांजी हाउसों में उनके चारे आदि का प्रबंध नहीं है।

मानस नगर के रहने वाले अनिल ने बताया कि बीते 21 अक्टूबर को संत सांई स्कूल की गली में एक गाय ने बछड़े को को जन्म दिया था।

बछड़ा पैदा होते ही मर गया।

गाय भी बेहोश अवस्था में पड़ी रही। उन्होंने इसे लेकर नगर निगम में शिकायत की लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला।

आलमबाग समर विहार कॉलोनी निवासी शिवि ने बताया कि नगर निगम की गाड़ी कभी-कभी आती है। कुछ पशुओं को पकडकऱ ले जाती है लेकिन अधिकांश यहीं रह जाते हैं।

खस्ताहाल आश्रय स्थल

राजधानी के पारा खेड़ा में बने पशु आश्रय गृह की हालत खस्ता है। क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि यहां रखे गए पशुओं को चारा आदि नहीं मिल पाता है।

पशु भुखमरी के शिकार हो चुके हैं। यहां गाय और सांड सबसे अधिक संख्या में मौजूद हैं। पर्याप्त चार नहीं मिलने के कारण यहां बंद पशुओं की हालत बेहद खराब हो चुकी है।

यह नगर निगम जोन 6 के अंतर्गत आता है लेकिन न तो नगर निगम के अधिकारी और न ही कर्मचारी इन पशुओं की कोई व्यवस्था कर रहे हैं।

हादसों में हो जाती है मौत

सडक़ों पर घूम रहे बेसहारा पशु हादसों का शिकार भी हो रहे हैं।

सरोजिनी नगर निवासी सूर्यभान ने बताया कि बीते 26 अगस्त को कानपुर रोड पर सडक़ों पर घूम रहे एक गोवंश को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी जिसके बाद उसकी मौत हो गई ।

नगर निगम को सूचना देने के बावजूद दो दिन तक गोवंश का शव सडक़ पर ही पड़ा रहा।

मवैया निवासी सिमरन पाठक ने बताया कि बीते एक मार्च को मोबाइल क्रॉसिंग पर एक गोवंश को ट्रेन ने टक्कर मार दी जिसके कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई

और उसका शव कई दिन तक रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा रहा। ऐसे ही आए दिन बेसहारा पशु हादसों का शिकार हो रहे हैं।

अभियान चलाकर गोवंश व अन्य पशुओं को कांजी हाउस और कान्हा उपवन भेजा जा रहा है।

कुछ क्षेत्रों में अभी भी समस्या बनी हुई है, उसका भी निस्तारण जल्द कराया जाएगा ।
अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त

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