बतौर राष्ट्रपति बाइडेन ने पहले हफ्ते में 7 वर्ल्ड लीडर्स से बातचीत की; इनमें भारत, इजराइल और सऊदी नहीं

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जो बाइडेन ने 20 जनवरी को अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी। सुपर पावर अमेरिका के लिए उसकी विदेश नीति बेहद अहम होती है। बाइडेन ने पहले हफ्ते में दुनिया के सिर्फ 7 राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बातचीत की। इनमें न तो अमेरिका का सबसे करीबी इजराइल है और न एशिया के दोनों शक्तियां यानी भारत और चीन। थोड़ा और आगे बढ़ें। इस फेहरिस्त में कोई खाड़ी देश मसलन सऊदी अरब, यूएई और बहरीन भी शामिल नहीं हैं।

हर कॉल के पीछे मकसद
बाइडेन ने पहला फोन कनाडा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को किया था। बाइडेन ने सत्ता संभालते ही कनाडा के साथ प्रस्तावित की-स्टोन पाइपलाइन समझौते को रद्द कर दिया था। इससे कनाडा में काफी नाराजगी है। बाइडेन इस नाराजगी को दूर करना चाहते हैं। मैक्सिको के साथ बॉर्डर का मसला है। ट्रम्प के दौर में नाटो देश अमेरिका से दूर हो रहे थे। बाइडेन उन्हें करीब लाना चाहते हैं। यानी कुल मिलाकर बाइडेन उन देशों को फिर अमेरिका से जोड़ना चाहते हैं जो अमेरिका से नाराज हैं और जिनकी अमेरिका को सख्त जरूरत है।

इन नेताओं को क्यों नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक, बाइडेन ने उन देशों के नेताओं को अब तक फोन कॉल्स नहीं किए हैं, जिनसे अमेरिका के अच्छे रिश्ते हैं। हालांकि, चीन और ईरान इस मामले में अपवाद कहे जा सकते हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अब तक बाइडेन का फोन नहीं आया। माना जा रहा है कि इन दोनों देशों से अमेरिका के करीबी रिश्ते हैं और बाइडेन आने वाले दिनों में मोदी और नेतन्याहू से बातचीत जरूर करेंगे। दोनों ही देश अमेरिका के स्ट्रैटेजिक पार्टनर भी हैं।

एक मामला खाड़ी देशों यानी गल्फ कंट्रीज को लेकर है। ट्रम्प ने मिडल-ईस्ट में अमन बहाली के लिए बहुत मेहनत की। वे काफी हद तक कामयाब भी हुए। इजराइल और खाड़ी देश करीब आए। बहरीन और यूएई जैसे देशों ने इजराइल से डिप्लोमैटिक रिलेशन शुरू किए। इजराइल ने तो यूएई में अपनी एम्बेसी भी शुरू कर दी है। सऊदी अरब भी काफी हद तक इजराइल के करीब आ चुका है, हालांकि औपचारिक तौर पर उसने अभी उसे मान्यता नहीं दी है।

ट्रम्प और ओबामा ने क्या किया था
ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के शुरुआती हफ्ते में मैक्सिको, जर्मनी, फ्रांस और रूस के नेताओं से बातचीत की थी। लेकिन, सबसे पहले उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री से कार्यकाल शुरू होने के तीसरे दिन ही बातचीत की थी।
जब ओबामा पहली बार राष्ट्रपति बने थे तो उन्होंने पहले हफ्ते में इजिप्ट, इजराइल, जॉर्डन और फिलिस्तीन के नेताओं से बातचीत की थी।

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