अमेरिकी वोटर का मन राष्ट्रपति चुनाव के सामान्य स्थिति नहीं


अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट पडऩे के दूसरे दिन भी मतों की गिनती का काम चल ही रहा है।

यह कोई सामान्य स्थिति नहीं है, क्योंकि नतीजे आम तौर पर वोटिंग की रात में ही आ जाते हैं। कांटे की इस टक्कर में अभी तक यह साफ नहीं हो सका है

कि ऊंट आखिर किस करवट बैठेगा, मगर इन चुनावों को ऐतिहासिक बनाने वाले कारक और भी हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप चुनाव से पहले ही कह चुके थे कि अगर नतीजे उनके खिलाफ आए तो जरूरी नहीं कि वे उन्हें चुपचाप स्वीकार कर ही लेंगे।

मतगणना के दौरान भी उन्होंने धांधली के आरोप लगाते हुए कोर्ट जाने की धमकी दी है। अमेरिका में भय और आशंका का जैसा माहौल देखा जा रहा है

, वैसा हालिया इतिहास के किसी चुनाव में नहीं देखा गया। न सिर्फ वाइट हाउस की सुरक्षा बढ़ाई गई है,

बल्कि तमाम बड़ी दुकानों के बाहर भी इस तरह के इंतजाम किए जा रहे हैं कि दंगाई उन्हें आसानी से निशाना न बना सकें। लोगों को डर है

कि कहीं ट्रंप समर्थक राइफलें लेकर सड़कों पर न निकल आएं।
बहरहाल, यह सब अमेरिका के लिए भले नया हो, कई अन्य लोकतंत्रों में ऐसी स्थितियां देखी जाती रही हैं।

अभी तक के नतीजों पर गौर करें तो ट्रंप का चुनाव अभियान बहुत मजबूती से संचालित हुआ जान पड़ता है।

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जोसफ बाइडन बहुत आगे दिखाए जा रहे थे और उनकी बढ़त का फासला दस फीसदी तक दिखाया जा रहा था।

लेकिन जिस तरह की टक्कर दोनों प्रत्याशियों में दिख रही है, उससे लगता है कि अमेरिकी मतदाताओं के बीच ट्रंप की पकड़ कमजोर नहीं हुई है।

उनका काम करने का अंदाज, उनके फैसले और बयान अमेरिका के बाहर उनकी छवि चाहे जैसी भी बनाते हों,

अमेरिकी समाज का बड़ा हिस्सा इसे सहज रूप में लेता है। इसका मतलब यह भी है कि अमेरिकी समाज की जैसी छवि हमने अपने मन में बना रखी है,

वह हकीकत से काफी दूर है।
अमेरिका को हम जिन आधुनिक मूल्यों से जोड़कर देखते रहे हैं, उनकी धज्जियां उड़ाते हुए ट्रंप अमेरिकी समाज के एक बड़े हिस्से में मान्य बने रहते हैं

तो यह बताता है कि हमें अमेरिकी समाज को देखने-समझने का तरीका बदलना होगा। एक गुत्थी यह भी है

कि ‘ब्लैक लाइव्स मैटरÓ जैसे सघन आंदोलन के बीच हुए इन चुनावों में ट्रंप को मिले अश्वेत वोट पिछले चुनावों की तुलना में दो फीसदी बढ़ गए हैं।

उनके लिए सकारात्मक साबित हुए चुनावी कारकों में एक उनकी यह उपलब्धि भी है कि अमेरिका में बेरोजगारी का स्तर उन्होंने ऐतिहासिक रूप से नीचे ला दिया।

दूसरे छोर से देखें तो डेमोक्रेटिक प्रत्याशी जोसफ बाइडेन के व्यक्तित्व में अलग से कोई चमकीली बात भले न चिह्नित की जा सके, पर मुद्दों की ताकत शुरू से उनके साथ रही है।

कुल वोटों की गिनती में वे ट्रंप से आगे हैं और राष्ट्रपति पद पर उनका दावा भी ज्यादा मजबूत माना जा रहा है। देखें, यह चमत्कारिक चुनाव आगे क्या रंग दिखाता है।

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