फलपट्टी में हरियाली की जगह उग रहे कंक्रीट के जंगल

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-पूर्व में हुआ पौधरोपण महज खानापूर्ति, पानी व देखरेख के अभाव में नष्ट हुए पौधे
अजय सिंह चौहान
लखनऊ,25 जून(आरएनएस )। राजधानी के बख्शी का तालाब फलपट्टी क्षेत्र में धीरे-धीरे हरियाली की जगह सीमेंट व कंक्रीट के जंगल खड़े हो रहे हैं। हर साल पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण की खानापूर्ति तो होती है, लेकिन चंद दिनों में ही लगाए गए पौधे पानी के अभाव में मर जाते हैं। पिछले साल भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण हुआ था, लेकिन अधिकांश पौधे मृतप्राय: हो चुके हैं।वहीं फलपट्टी क्षेत्र के अधिकांश गांवों में उद्यान विभाग व वन विभाग खुलेआम फलपट्टी क्षेत्र के नियमों को दरकिनार कर अवैध कालोनियों को विकसित करने के लिए हरे भरे आम के पेड़ों के परमिट को जारी कर कंक्रीट के जंगल उगाने के लिए खुलेआम अपनी स्वीकृति प्रदान कर रहे हैं।
क्षेत्रीय पर्यावरण जानकार बताते हैं कि फलपट्टी क्षेत्र के अंतर्गत सम्मिलित गांवों के राजस्व अभिलेखों का जिले के किसी भी जिम्मेदार उच्चाधिकारी द्वारा अगर भौतिक कर लिया जाय तो फलपट्टी क्षेत्र में हरे भरे आम के बगानों की विनाश लीला का पदार्फाश किया जा सकता है।लेकिन जिम्मेदार अफसर षिकायतों के बाद भी मौन हैं।जो जांच का विषय है।स्थानीय नागरिकों व जनप्रतिनिधियों के अनुसार गत वर्ष जुलाई माह में हरियाली महोत्सव के तहत वन विभाग के माध्यम से बड़ी संख्या में वन क्षेत्रों के साथ-साथ निजी भूमि पर भी पौधारोपण हुआ था। इस दौरान उपमुख्यमंत्री सहित क्षेत्रीय विधायक व सांसद द्वारा भी बीकेटी से चंद्रिका देवी रोड पर पौधे लगाए गए थे, लेकिन इनमें से अधिकांश पौधे या तो सूख चुके हैं या सूखने की कगार पर है। पौधे लगाने के बाद इनकी सही तरह से देखरेख नहीं हुई। पांच-पांच फुट के पौधे भी इसमें शामिल थे, लेकिन ये पौधे भी सूखकर टहनी हो गए हैं। अब सड़क के किनारे की हरियाली खत्म की जा रही है। कुछ इसी तरह की स्थित फलपट्टी क्षेत्र के कई दर्जन गांवों में भी है। यहां सड़क के दोनों ओर नीम, गुलमोहर सहित अन्य प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे। इनमें से अधिकांश पौधे सूख चुके हैं। इसी तरह शहर में भी धीरे-धीरे खत्म हो रही हरियाली को लेकर पर्यावरण प्रेमी भी आहत है।बीकेटी तहसील भाजपा के मण्डल संयोजक राघवेंद्र सिंह “मोनू ” का कहना है कि हरियाली की याद तो गर्मी के दिनों में आती है। पौधारोपण तो सभी कर देते हैं, लेकिन एक पौधे को पेड़ बनाना अपने आप में बड़ा महत्वपूर्ण है। शहर में तो कई स्थानों पर सीसी रोड बनाते समय पेड़ की जड़ों में पानी पहुंचने की जगह तक बंद कर दी गई।  


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