हार में जीत: महिला क्रिकेट की नई मंजिल

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महिला टी 20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल नतीजे भले मनमाफिक न आए हों, लेकिन इससे भारतीय टीम की उपलब्धि कम नहीं होती। पूरे टूर्नमेंट में अजेय रही और पहले ही मैच aमें ऑस्ट्रेलिया को हरा चुकी भारतीय टीम जब रविवार को फाइनल मुकाबले में उसके खिलाफ मैदान में उतरी तो टिक नहीं सकी। ऑस्ट्रेलिया द्वारा दिए गए 185 रन के विशाल टारगेट के जवाब में वह 99 रन ही बना सकी। बहरहाल, यह तथ्य तो समय की शिला पर अंकित हो ही चुका है कि हमारी टीम वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचने वाली पहली एशियाई टीम है।


वर्ल्ड चैंपियनशिप भले ही हाथ न आ सकी हो, पर देश में महिला क्रिकेट को मजबूती जरूर मिली है। यह वक्त है एक बार फिर इस सवाल से टकराने का कि हम अपनी महिला क्रिकेटरों को कितना ऊंचा दर्जा देते हैं/ क्या उन्हें वे सुविधाएं मिलती हैं, जो चैंपियन बनने लायक मन:स्थिति तैयार करने के लिए जरूरी हैं/ ये सवाल सिर्फ हमारे देश तक सीमित नहीं हैं, लेकिन दूसरे कई देश इनका जवाब तलाशने में हमसे आगे हैं।
ऑस्ट्रेलिया की जिन महिला क्रिकेटरों ने चैंपियनशिप जीती है, उन्हें भी पुरुष क्रिकेटरों के बराबर भुगतान की सहूलियत 2017 में ही मिली और इसके लिए उन्हें लंबी लड़ाई लडऩी पड़ी। हमारे यहां बराबर भुगतान तो अभी दूर की कौड़ी है, अलबत्ता 2017 में बीसीसीआई ने इनके लिए नया कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम लाने की घोषणा जरूर की। नतीजा यह कि इसके बाद न केवल इन महिला खिलाडिय़ों की कमाई बढ़ी बल्कि टीम को बाकायदा एक सपोर्ट यूनिट भी मिला, जिसका मतलब फिजियोथेरैपिस्ट और न्यूट्रीशनिस्ट की सेवाएं उपलब्ध होना था।
अगर टीम ने इस बार टी20 वर्ल्ड कप के दौरान हमें गर्व करने लायक इतने सारे पल दिए हैं तो इसके पीछे इन सहूलियतों और इसके चलते टीम के बढ़े हुए मनोबल का भी हाथ है। 16 साल की बैटिंग सनसनी शेफाली वर्मा पर हम चाहे जितना गर्व कर लें, पर इस हकीकत का क्या करेंगे कि महिला क्रिकेट में अंडर 16 टूर्नमेंट तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और गोवा जैसे दक्षिणी राज्यों में ही होते हैं।
अगर महिलाओं के लिए आईपीएल जैसा कोई आयोजन होता तो दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद ज्यादा ठोस रूप ले सकती थी। इन तमाम सुविधाओं का सीधा संबंध खेल की लोकप्रियता और इसके लिए मिलने वाले स्पॉन्सरों से है। लेकिन यह सब तभी होगा जब इसके लिए खुले दिलो-दिमाग से कोशिश की जाएगी।
ब्रिटेन में हंड्रेड के रूप में क्रिकेट के नए फॉरमैट पर बात हो रही है, जिसमें 100-100 बॉल का खेल होने और महिला व पुरुष दोनों क्रिकेट टीमों को शामिल करने का प्रस्ताव है। ऐसे नए प्रयोगों की दिशा में हमें भी कदम बढ़ाना चाहिए। टी 20 महिला वर्ल्ड कप में हमारी लड़कियों का प्रदर्शन अगर इस दिशा में हमारी सोच को खोलता है तो यह खुद में कोई कम बड़ी उपलब्धि नहीं होगी।


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