सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- सरकारी नौकरी के चयन में मेरिट की अनदेखी संविधान का उल्लंघन

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरी में चयन के मामले में दिए गए एक फैसले में कहा है कि सरकारी नौकरी में चयन का आधार मेरिट ही होना चाहिए। मेरिट में नीचे स्थान वालों की नियुक्त करना और ऊंचा स्थान पाने वालों की अनदेखी करना संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और 16 (सरकारी नौकरी में समान अवसर) में दिए गए अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने झारखंड में 2008 की पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती मामले में झारखंड हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए अपने आदेश में यह टिप्पणी की। 

Quota policy not meant to deny merit, says Supreme Court | Hindustan Times

इस मामले में सारा विवाद 2008 की पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती में पहली चयन सूची और नियुक्ति में अनियमितताएं पाए जाने के बाद नए सिरे से मेरिट के आधार पर तैयार की गई दूसरी चयन सूची और नियुक्तियों से उपजा था। मेरिट के आधार पर बनाई गई दूसरी चयन सूची और नियुक्तियों के बाद पहली सूची के आधार पर नियुक्त हुए कम मेरिट वाले 42 लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया और ऊंची मेरिट के 43 अन्य को शामिल कर लिया गया। निकाले गए लोग न सिर्फ ट्रेनिंग कर चुके थे बल्कि अच्छे खासे समय तक नौकरी भी कर चुके थे।

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया

झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि जिन्हें नौकरी से निकाला गया है, उन्हें फिर से समायोजित किया जाए क्योंकि वे ट्रेनिंग कर चुके हैं और काफी दिन नौकरी भी कर चुके हैं। इसके अलावा चयन और भर्ती में हुई अनियमितताओं में उनका कोई दोष नहीं है। इस फैसले को झारखंड सरकार के अलावा उन लोगों ने भी चुनौती दी थी, जिन्होंने मामले में हस्तक्षेप याचिका दाखिल करते हुए नई चयन सूची के हिसाब से दोबारा बहाल किये गये लोगों से ज्यादा नंबर पाने का दावा करते हुए नौकरी पर रखे जाने की मांग की थी। 

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